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पट्टण कोडोलीची विठ्ठल-बिरदेव यात्रा

पट्टण कोडोलीची विठ्ठल-बिरदेव यात्रा आपले मेंढपाळ बांधव वर्षनुवर्षं डोंगर खोऱ्यात मेंढ्या राखत असतात. या मेंढ्या राखताना त्यांचे व त्यांच्या मेंढ्यांचे वाईट अदृश्य शक्ती पासून संरक्षण व्हावे म्हणून ते बिरोबा देवाला पूजतात. बिरोबा म्हणजे शिवाचा अवतार. या बिरोबा देवाची भारतभरात एकूण मुख्य १२ ठाणी आहेत, त्यातील ६ महाराष्ट्र आहेत आणि या सहा पैकी एक म्हणजे कोल्हापूर जिल्ह्यातील पट्टण-कोडोलीचा(ता,हतकणंगले) विठ्ठल-बिरदेव. पट्टण कोडोलीच्या विठ्ठल-बिरदेव यात्रे बद्दल थोडक्यात सांगायचे म्हटले तर, हि यात्रा म्हणजे अहिंसेचा संदेश देणारी यात्रा. महाराष्ट्रातील धनगर समाज हा मुख्यत्वेकरुन मांसाहारी आहे पण या समाजाची सर्वात मोठी यात्रा जेथे भरते तो देव मात्र पुर्णपणे शाकाहारी आणी अहिंसेचा प्रचार करणारा आहे, तो देव म्हणजे पट्टणकोडोली येथील श्री विठ्ठल-बिरदेव. विठ्ठल तर पंढरपूरचाच आहे आणी बिरदेव शिवांचा अवतार आहे. हे दोघे हरि-हर धनगर समजाबरोबर बारा बलुतेदार समाजाला पूज्य आहेत, साधारणतः महाराष्ट्रातल्या लोकदैवतांच्या जत्रा म्हणजे त्यात मांसाहार ठरलेला असतोच पण या यात्रेत मात्र धनगर समाजाचे वर्चस्व असूनही ...

महाजनपद काल - एक सम्पूर्ण यात्रा (भाग-15)-अवंती महाजनपद

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महाजनपद काल - एक सम्पूर्ण यात्रा (भाग-15)-अवंती महाजनपद   महाजनपद काल - एक सम्पूर्ण यात्रा (भाग-15)-अवंती महाजनपद (Mahajanpada Period-Avanti Mahajanpada) *अवंती, पौराणिक 16 महाजनपदों में से एक था। *आधुनिक मालवा का प्रदेश जिसकी राजधानी उज्जयिनी और महिष्मति थी। *यह महाजनपद दो भागों में विभाजित था। *उत्तरी भाग की राजधानी उज्जयिनी और दक्षिणी भाग की राजधानी महिष्मति थी। *उज्जयिनी (उज्जैन) मध्य प्रदेश राज्य का एक प्रमुख शहर है। प्राचीन संस्कृत तथा पाली साहित्य में अवंती या उज्जयिनी का सैंकड़ों बार उल्लेख हुआ है। *महाभारत में सहदेव द्वारा अवंती को विजित करने का वर्णन है। *बौद्ध काल में अवंती उत्तरभारत के शोडश महाजनपदों में से थी जिनकी सूची अंगुत्तरनिकाय में हैं। *जैन ग्रंथ भगवती सूत्र में इसी जनपद को मालव कहा गया है। इस जनपद में स्थूल रूप से वर्तमान मालवा, निमाड़ और मध्य प्रदेश का बीच का भाग सम्मिलित था। *पुराणों के अनुसार अवंती की स्थापना यदुवंशी क्षत्रियों द्वारा की गई थी। *पुराणों के अनुसार पुणिक नामक सेनापति ने यदुवंशीय वीतिहोत्र नामक शासक की हत्या करके अपने पुत्र प्रद्योत को अवन्ति क...

महाजनपद काल - एक सम्पूर्ण यात्रा (भाग-14)-अश्मक महाजनपद

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महाजनपद काल - एक सम्पूर्ण यात्रा (भाग-14)-अश्मक महाजनपद   महाजनपद काल - एक सम्पूर्ण यात्रा (भाग-14)-अश्मक महाजनपद (Mahajanpada Period-Ashmak Mahajanpada) अश्मक अथवा अस्सक महाजनपद पौराणिक 16 महाजनपदों में से एक था। *नर्मदा और गोदावरी नदियों के बीच अवस्थित इस प्रदेश की राजधानी 'पाटन' थी। *आधुनिक काल में इस प्रदेश को महाराष्ट्र कहते हैं। *दक्षिण भारत में स्थित यह एकमात्र जनपद था। *पुराणों के अनुसार इस महाजनपद के शासक इक्ष्वाकु वंश के थे। *अवंति ने बाद में अश्मक को जीत लिया था। *बौद्ध साहित्य में इस प्रदेश का उल्लेख मिलता है, जो गोदावरी के तट पर स्थित था। स्थिति- *'महागोविन्दसूत्तन्त' के अनुसार यह प्रदेश रेणु और धृतराष्ट्र के समय में विद्यमान था। इस ग्रन्थ में अस्सक के राजा ब्रह्मदत्त का उल्लेख है। *सुत्तनिपात में अस्सक को गोदावरी तट पर स्थित बताया गया है। *इसकी राजधानी पोतन, पौदन्य या पैठान में थी। *पाणिनि ने अष्टाध्यायी में भी अश्मकों का उल्लेख किया है। *सोननंदजातक में अस्सक को अवंती से सम्बंधित कहा गया है। *अश्मक नामक राजा का उल्लेख वायु पुराण और महाभारत में है--'अश्...

महाजनपद काल - एक सम्पूर्ण यात्रा (भाग-13)-मत्स्य महाजनपद

महाजनपद काल - एक सम्पूर्ण यात्रा (भाग-13)-मत्स्य महाजनपद  महाजनपद काल - एक सम्पूर्ण यात्रा (भाग-13)-मत्स्य महाजनपद (Mahajanpada Period-Matsya Mahajanpada) मत्स्य महाजनपद- *मत्स्य 16 महाजनपदों में से एक है। *इसमें राजस्थान के अलवर, भरतपुर तथा जयपुर ज़िले के क्षेत्र शामिल थे। *महाभारत काल का एक प्रसिद्ध जनपद जिसकी स्थिति अलवर-जयपुर के परिवर्ती प्रदेश में मानी गई है। *इस देश में विराट का राज था तथा वहाँ की राजधानी उपप्लव नामक नगर में थी। *विराट नगर मत्स्य देश का दूसरा प्रमुख नगर था। दिग्विजय यात्रा- *सहदेव ने अपनी दिग्विजय-यात्रा में मत्स्य देश पर विजय प्राप्त की थी। *भीम ने भी मत्स्यों को विजित किया था। *अलवर के एक भाग में शाल्व देश था जो मत्स्य का पार्श्ववती जनपद था। *पांडवों ने मत्स्य देश में विराट के यहाँ रह कर अपने अज्ञातवास का एक वर्ष बिताया था। ऋग्वेद में उल्लेख- *मत्स्य निवासियों का सर्वप्रथम उल्लेख ऋग्वेद में है। *इस उद्धरण में मत्स्यों का वैदिक काल के प्रसिद्ध राजा सुदास के शत्रुओं के साथ उल्लेख है। ग्रन्थों में उल्लेख- शतपथ ब्राह्मण में मत्स्य-नरेश ध्वसन द्वैतवन का उल्लेख ह...

महाजनपद काल - एक सम्पूर्ण यात्रा (भाग-11)-वज्जि महाजनपद

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महाजनपद काल - एक सम्पूर्ण यात्रा (भाग-11)-वज्जि महाजनपद   महाजनपद काल - एक सम्पूर्ण यात्रा (भाग-11)-वज्जि महाजनपद (Mahajanpada Period-Vajji Mahajanpada) वज्जि या वृजि प्राचीन भारत के 16 महाजनपदों में से एक था।यह महाजनपद मगध के उत्तर में स्थित था।कई छोटे राज्यों को मिलाकर इसकी उत्पत्ति हुई थी,यह संघ आठ कुलों के संयोंग से बना और इनमें चार (विदेह, ज्ञातृक, वज्जि और लिच्छवि) कुल अधिक प्रमुख थे । इसकी राजधानी वैशाली थी। वज्जि के गणराज्य बनने के बाद इसका राज्य-संचालन अष्टकुल द्वारा होने लगा। वज्जि गणराज्य - *उत्तर बिहार का बौद्ध कालीन गणराज्य जिसे बौद्ध साहित्य में वृज्जि कहा गया है। *वास्तव में यह गणराज्य एक राज्य-संघ था जिसके आठ अन्य सदस्य (अट्ठकुल) थे जिनमें विदेह, लिच्छवी तथा ज्ञातृकगण प्रसिद्ध थे। *वृजियों का उल्लेख पाणिनि ने दिया है। *कौटिल्य अर्थशास्त्र में वृजिकों को लिच्छविकों से भिन्न बताया गया है और वृजियों के संघ का भी उल्लेख किया गया है। *युवानच्वांग ने भी वृज्जि देश को वैशाली से अलग बताया है किन्तु फिर भी वृजियों का वैशाली से निकट सम्बन्ध था। *बुद्ध के जीवनकाल में मगध सम्रा...

महाजनपद काल - एक सम्पूर्ण यात्रा (भाग-12)-चेदि महाजनपद

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महाजनपद काल - एक सम्पूर्ण यात्रा (भाग-12)-चेदि महाजनपद   महाजनपद काल - एक सम्पूर्ण यात्रा (भाग-12)-चेदि महाजनपद (Mahajanpada Period-Chedi Mahajanpada) चेदि या चेति महाजनपद- *पौराणिक 16 महाजनपदों में से एक था। *यह शुक्तिमती नदी के पास का देश था, जिसमें बुंदेलखंड का दक्षिणी भाग और जबलपुर का उत्तरी भाग सम्मिलित था। *बौद्ध ग्रंथों में जिन सोलह महाजनपदों का उल्लेख है उनमें यह भी था। कलिचुरि वंश ने भी यहाँ राज्य किया। *किसी समय शिशुपाल यहाँ का प्रसिद्ध राजा था। *उसका विवाह रुक्मिणी से होने वाला था कि श्रीकृष्ण ने रूक्मणी का हरण कर दिया इसके बाद ही जब युधिष्ठर के राजसूय यज्ञ में श्रीकृष्ण को पहला स्थान दिया तो शिशुपाल ने उनकी घोर निंदा की। *इस पर श्रीकृष्ण ने उसका वध कर डाला। *मध्य प्रदेश का ग्वालियर क्षेत्र में वर्तमान चंदेरी क़स्बा ही प्राचीन काल के चेदि राज्य की राजधानी बताया जाता है। अन्य तथ्य- *ऋग्वेद में चेदि नरेश कशुचैद्य का उल्लेख है । *रैपसन के अनुसार कशु या कसु महाभारत में वर्णित चेदिराज वसु है और इन्द्र के कहने से उपरिचर राजा वसु ने रमणीय चेदि देश का राज्य स्वीकार किया था। *महा...

महाजनपद काल - एक सम्पूर्ण यात्रा (भाग-10)-मगध महाजनपद

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महाजनपद काल - एक सम्पूर्ण यात्रा (भाग-10)-मगध महाजनपद   महाजनपद काल - एक सम्पूर्ण यात्रा (भाग-10)-मगध महाजनपद (Mahajanpada Period-Magadh Mahajanpada) मगध प्राचीन भारत के सोलह महाजनपद में से एक था । बौद्ध काल तथा परवर्तीकाल में उत्तरी भारत का सबसे अधिक शक्तिशाली जनपद था। इसकी स्थिति स्थूल रूप से दक्षिण बिहार के प्रदेश में थी। आधुनिक पटना तथा गया ज़िला इसमें शामिल थे । इसकी राजधानी गिरिव्रज थी । भगवान बुद्ध के पूर्व बृहद्रथ तथा जरासंध यहाँ के प्रतिष्ठित राजा थे । अभी इस नाम से बिहार में एक प्रमंडल है - मगध प्रमंडल। मगध का सर्वप्रथम उल्लेख अथर्ववेद में मिलता है । इससे सूचित होता है कि प्राय: उत्तर वैदिक काल तक मगध, आर्य सभ्यता के प्रभाव क्षेत्र के बाहर था। अभियान चिन्तामणि के अनुसार मगध को कीकट कहा गया है । मगध बुद्धकालीन समय में एक शक् ‍ तिशाली राजतन्त्रों में एक था । यह दक्षिणी बिहार में स्थित था जो कालान्तर में उत्तर भारत का सर्वाधिक शक् ‍ तिशाली महाजनपद बन गया । यह गौरवमयी इतिहास और राजनीतिक एवं धार्मिकता का विश् ‍ व केन्द्र बन गया । मगध महाजनपद की सीमा उत्तर में गंगा से दक्षिण मे...