Posts

Showing posts from August, 2020

वाग्भट

Image
वाग्भट वाग्भट  नाम से कई महापुरुष हुए हैं। इनका वर्णन इस प्रकार है: वाग्भट (१) संपादित करें आयुर्वेद  के प्रसिद्ध ग्रंथ  अष्टांगसंग्रह  तथा  अष्टांगहृदय  के रचयिता। प्राचीन संहित्यकारों में यही व्यक्ति है, जिसने अपना परिचय स्पष्ट रूप में दिया है। अष्टांगसंग्रह के अनुसार इनका जन्म सिंधु देश में हुआ। इनके पितामह का नाम भी वाग्भट था। ये अवलोकितेश्वर गुरु के शिष्य थे। इनके पिता का नाम सिद्धगुप्त था। यह बौद्ध धर्म को माननेवाले थे। इत्सिंग ने लिखा है कि उससे एक सौ वर्ष पूर्व एक व्यक्ति ने ऐसी संहिता बनाई जिसें आयुर्वेद के आठो अंगों का समावेश हो गया है। अष्टांगहृदय का  तिब्बती भाषा  में अनुवाद हुआ था। आज भी अष्टांगहृदय ही ऐसा ग्रंथ है जिसका जर्मन भाषा में अनुवाद हुआ है। गुप्तकाल  में पितामह का नाम रखने की प्रवृत्ति मिलती है : चंद्रगुप्त का पुत्र  समुद्रगुप्त , समुद्रगुप्त का पुत्र चंद्रगुप्त (द्वितीय) हुआ। ह्वेन्साँग  का समय 675 और 685 शती ईसवी के आसपास है। वाग्भट इससे पूर्व हुए हैं। वाग्भट की भाषा में  कालिदास जैसा लालित्य मिलता...

प्रमुख एवं लघु शिलालेखों तथा स्तंभलेखों की सूची

Image
प्रमुख एवं लघु शिलालेखों तथा स्तंभलेखों की सूची Nov 15, 2016, Shakeel Anwar     भारतीय इतिहास के सबसे शक्तिशाली सम्राटों के संरक्षण में बौद्ध धर्म का प्रसार किस प्रकार हुआ इसका पहला प्रमाण शिलालेखों से प्राप्त हुआ था| इन शिलालेखों की व्याख्या सर्वप्रथम ब्रिटिश पुरातत्वविद् और इतिहासकार  जेम्स   प्रिंसेप  द्वारा की गई थी| इन शिलालेखों में मूल रूप से राज्य को चलाने में सहायक व्यावहारिक निर्देश जैसे- सिंचाई प्रणालियों की योजना, सम्राटों के शांतिपूर्ण नैतिक व्यवहार की व्याख्या की गई थी| प्रमुख शिलालेख I इस शिलालेख में राजा द्वारा विशेष रूप से उत्सव समारोहों के दौरान पशु वध को निषिद्ध घोषित करने का वर्णन है| प्रमुख शिलालेख II इस शिलालेख में दक्षिण भारत के राज्यों जैसे चोल, पांड्य, सतपुड़ा और केरलपुत्र का वर्णन है| इसके अलावा इस शिलालेख में मनुष्य और जानवरों के देखभाल से संबंधित आदेशों का वर्णन है| प्रमुख शिलालेख III इस शिलालेख का निर्माण अशोक के राज्याभिषेक के 12 साल बाद किया गया था| इस शिलालेख में कहा गया है कि “युक्त” (अधीनस्थ अधिकारी), “प्रादेशिक” (जिला प्रमुखों) ...

अशोक के धम्म पर प्रकाश डालते हुए बताएँ कि यह अशोक के राजनीतिक उद्देश्यों की प्राप्ति में किस प्रकार सहायक था? क्या अशोक की राजनीति पूर्णतः इसके अनुकूल थी?

  अशोक के धम्म पर प्रकाश डालते हुए बताएँ कि यह अशोक के राजनीतिक उद्देश्यों की प्राप्ति में किस प्रकार सहायक था? क्या अशोक की राजनीति पूर्णतः इसके अनुकूल थी? उत्तर  : उत्तर की रूपरेखा: अशोक के धम्म के बारे में बताएँ। इसे अशोक की राजनीति से जोड़ते हुए बताएँ कि यह अशोक की राजनैतिक उदेश्यों की प्राप्ति में किस प्रकार सहायक रही। अशोक का धम्म वस्तुतः एक नैतिक संहिता थी जिसका उद्देश्य लोगों में प्रेम, नैतिकता, शांति तथा सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को जगाकर अपने विशाल साम्राज्य में शांति बनाए रखना था। अपने दूसरे स्तंभलेख में अशोक स्वयं प्रश्न करता है- कियं चू धम्में? अपने दूसरे तथा सातवें शिलालेख के माध्यम से वह इसका उत्तर भी देता है- " अपासिनवे बहुकयाने दयादाने सचे साचये मादवे साधवे च” अर्थात कम पाप करना, कल्याण करना दया-दान करना, सत्य बोलना, पवित्रता से रहना, स्वभाव में मधुरता तथा साधुता बनाए रखना जैसे तत्त्व अशोक के धम्म में शामिल हैं| धम्म घोष से पूर्व अशोक कलिंग विजय कर चुका था और संपूर्ण भारत में मौर्य साम्राज्य का विस्तार हो चुका था। अशोक का मुख्य लक्ष्य अब अपनी प्रजा के ...

अभिधम्मपिटक

Image
अभिधम्मपिटक त्रिपिटक •  विनयपिटक  •  सुत्तपिटक  • • अभिधम्मपिटक  • अभिधम्मपिटक  हा प्रमुख बौद्ध ग्रंथ  त्रिपिटकाचा  एक भाग आहे. सुत्तपिटकातील विषय प्रश्नोत्तराच्या रुपाने दिले आहेत.  सुत्तपिटक  आणि अभिधम्मपिटक या दोन्ही ग्रंथाचे विषय एकच आहेत. या दोन ग्रंथात फरक इतकाच आहे की, अभिधम्मपिटकातील ग्रंथाची माहिती अधिक सविस्तर, रुक्ष व पांडित्यपूर्ण आहे. अभिधम्म म्हणजे सर्वश्रेष्ठ किंवा धर्माची श्रेष्ठ तत्वे होत. अभिधम्मपिटकात एकंदर सात ग्रंथ मोडतात. अभिधम्मपिटकात प्रामुख्याने सात ग्रंथांचा समावेश आहे. १. धम्मसंगणि २. विभंग ३. धातुकथा ४. पुग्गलपञती ५. कथावत्थु ६. यमक ७. पट्ठान विविध भाषेत नाव अभिधम्मपिटक इंग्रजी higher teaching, meta-teaching पाली अभिधम्म संस्कृत अभिधर्म बंगाली অভিধর্ম্ম ôbhidhôrmmô बर्मी साचा:My   ( साचा:IPA-my ) चीनी 阿毗達磨 (T) / 阿毗达磨(S)   ( pinyin :  āpídámó ) जपानी 阿毘達磨   ( rōmaji :  abidatsuma ) ख्मेर អភិធម្ម  (aphitam) कोरियन 아비달마   ( RR :  abidalma ) सिंहला අභිධර්ම   ( abhidharm...

त्रिपिटक

Image
त्रिपिटक गौतम बुद्ध त्रिपिटक  ( पाली  :  तिपिटक ) हा  बौद्ध  धर्मीयांचा प्रमुख व महत्त्वाचा धर्मग्रंथ आहे. इ.स.पू. १०० ते इ.स.पू. ५०० या दरम्यान,  मौर्य  राजवंशाच्या कार्यकाळात या ग्रंथांची निर्मिती झाली. त्रिपिटक हा ग्रंथ  पाली  भाषेत लिहिला गेलेला एक ग्रंथसमूह असून तो तीन पेट्यांत किंवा हिश्श्यांत विभागला गेला आहे. त्रिपिटकाचे तीन विभाग — विनयपिटक, सुत्तपिटक व अभिधम्मपिटक. या तीन पिटकांमुळे या ग्रंथाला 'त्रिपिटक' हे नाव पडले. त्रिपिटक •  विनयपिटक  •  सुत्तपिटक  • • अभिधम्मपिटक  • विविध भाषेत नाव त्रिपिटक इंग्रजी Three Baskets पाली Tipiṭaka संस्कृत त्रिपिटक Tripiṭaka बंगाली ত্রিপিটক बर्मी साचा:My चीनी 大藏经   ( pinyin :  Dàzàngjing ) जपानी 三蔵 (さんぞう)   ( rōmaji :  sanzō ) ख्मेर ព្រះត្រៃបិដក कोरियन 삼장 (三臧)   ( RR :  samjang ) सिंहला ත්‍රිපිටකය थाई พระไตรปิฎก व्हियेतनामी Tam tạng बौद्ध धर्म तीन विभाग  विनयपिटक  (संस्कृत व पाली) सूत्रपिटक  (संस्कृत; पाली-सुत्तपिटक) अभिधर्मपिटक ...

सुत्तपिटक

Image
सुत्तपिटक त्रिपिटक •  विनयपिटक  •  सुत्तपिटक  • • अभिधम्मपिटक  • सुत्तपिटक  हा प्रमुख बौद्ध ग्रंथ  त्रिपिटकाचा  एक भाग आहे. 'सुत्त' या शब्दाचा अर्थ उपदेशपर वाक्य किंवा प्रवचन होय. यात धर्माविषयीच्या उपदेशांचा संग्रह करण्यात आलेला आहे. याचे पाच निकाय (संग्रह) आहेत. २. सुत्तपिटक : सुत्तपिटकामध्ये पाच ग्रंथांचा समावेश होतो. (अ) दिघ निकाय - ३४ सुत्त, (ब) मज्झिम निकाय - १५२ सुत्त (क) संयुत्त निकाय - ७७६२ सुत्त (ड) अंगुत्तर निकाय - ९५५७ सुत्त (इ) खुद्दक निकाय - खुद्दक निकायामध्ये इतर निकायांप्रमाणे सुत्तांऐवजी १५ ग्रंथांचा समावेश होतो. ते पुढील प्रमाणे : १. खुद्दकपाठ २. धम्मपद ३. उदान ४. इत्थिवत्थु ५. सुत्तनिपात ६. विमानवत्थु ७. पेतवत्थु ८. थेरगाथा ९. थेरीगाथा १०. जातक ११. अपदान १२. निद्देस १३. पटिसंभिदामग्ग १४. बुद्धवंश १५. चरियापिटक संदर्भ शेवटचा बदल १० महिन्यां पूर्वी   Sandesh9822  कडून संबंधित लेख अभिधम्मपिटक महापरिनिब्बाण सुत्त त्रिपिटक

विनयपिटक

Image
विनयपिटक त्रिपिटक •  विनयपिटक  •  सुत्तपिटक  • • अभिधम्मपिटक  • विनय पिटक  हा प्रमुख बौद्ध ग्रंथ  त्रिपिटकचा  एक भाग आहे. या ग्रंथांत बौद्ध  भिक्खू - भिक्खूणी  संघांच्या दैनंदिन आचारासंबधीचे नियम-आचार-विचार इत्यादींचे संकलन करण्यात आले आहे. विनयपिटकातील ग्रंथ पुढीलप्रमाणे (१). विनयपिटक : सामान्यतः विनयपिटकामध्ये (अ) महावग्ग (ब) चुलवग्ग (क) पाराजिक (ड) पाचित्तिय (इ) परिवार. या पाच ग्रंथांचा समावेश आहे. सुत्तविभागात भिक्षू व बौद्ध संघाच्या नियमांच्या उत्पत्तीच्या कथा आहेत. खंदकातील महावग्गात  बुद्ध  व  संघ यांच्याबद्दलच्या आख्यायिका आहेत तर परिवारात विनयपिटकातील विषय प्रश्नोत्तररूपाने हाताळले आहेत

बौद्ध साहित्य

बौद्ध साहित्य बौद्ध साहित्य  किंवा  बौद्ध वाङमय  हे  बौद्ध धर्माशी  संबंधित ग्रंथ साहित्यकृती आहे. बौद्ध साहित्य मुख्यतः  पाली ,  संस्कृत व प्राकृत भाषेसह विविध देशांतील प्रादेशिक भाषेत निर्माण झाले आहे. बौद्ध साहित्य इतके विशाल आहे की, कोणताही एक व्यक्ती आयुष्यभरही संपूर्ण बौद्ध साहित्य वाचू शकत नाही.  थेरवादी  बौद्धांनी पाली भाषेत  बुद्धांची  शिकवण जतन करून याच भाषेत बौद्ध धर्माचा प्रचार व प्रसार केला तर  महायानी  बौद्धांनी भक्कमपणे संस्कृत भाषेत बुद्ध शिकवण जतन करून संस्कृत मधूनच त्याचा प्रचार-प्रसार केला. बुद्धांनी  भिक्खुंना  आदेश दिला होता की, त्यांनी आपली वचने आपापल्या भाषेत परावर्तीत करावीत.  वैदिक (संस्कृत) भाषेत आपला उपदेश परावर्तीत करायला मात्र त्यांचा विरोध होता. कारण ही भाषा सर्वजनांची लोकभाषा नव्हती, म्हणून बौद्ध धर्माचे ग्रंथ प्राकृत व पाली भाषेत आढळतात. [१] इ.स.च्या दुसऱ्या तिसऱ्या शतकापासून  संस्कृत  भाषेची प्रतिष्ठा वाढल्याने संस्कृत,  तिबेटी  आणि चीनी या भाषेतही बौद्ध स...

भारतातील प्राचिन विद्यापिठ

Image

हमेशा प्रसन्न रहने के लिए जरूरी है मन में सुविधाओं के त्याग का भाव भी हो

Image
हमेशा प्रसन्न रहने के लिए जरूरी है मन में सुविधाओं के त्याग का भाव भी हो एक वर्ष पहले गौतम बुद्ध ने राजा को बताई उसके सम्पन्नता से घिरे राजकुमारों की सबसे बड़ी कमजोरी No ad for you जीवन मंत्र डेस्क.  एक बौद्ध कथा है। भगवान बुद्ध के पास एक राजा आए और पूछा कि हमारे राजकुमार, जिन्हें हर तरह की सुविधाएं हैं, जो बड़े महल में रहते हैं, जिनके साथ नौकर-चाकरों की पूरी फौज है, वे खुश नहीं रहते। हमेशा तनाव और परेशानी से घिरे दिखते हैं। हमने हर तरह की सुविधा देकर देख ली। वे प्रसन्न नहीं रह पा रहे। जबकि, आपके ये भिक्षु जो पदयात्रा करते हैं, खाने को जैसा मिल जाता है, खा लेते हैं, रहने को जो कुटिया मिल जाए वहां रह लेते हैं, इनके चेहरे पर हमेशा इतनी खुशी रहती है। इसका कारण क्या है?   भगवान बुद्ध ने उत्तर दिया, खुशियां खोजनी हो तो जिसके पास कुछ भी न हो, उस में खोजो। जिसने संकल्प करके सब कुछ छोड़ दिया, वही खुश रह सकता है। जो स्वेच्छा से चीजों का त्याग करता है, वो ही हमेशा प्रसन्न रह सकता है। भिखारी कभी ख्रुश नहीं होगा, क्योंकि उसने छोड़ा नहीं है। वह तो अभाव में ही जीवन जी रहा है। अभाव का जीवन ज...

गौतम बुद्धांच्या 'या' हस्तमुद्रांचा नेमका अर्थ काय? वाचा

Image
गौतम बुद्धांच्या 'या' हस्तमुद्रांचा नेमका अर्थ काय? वाचा Devesh Phadke  | Maharashtra Times  |  Updated: 07 May 2020, 02:47:44 PM बौद्ध धर्मीयांसाठी अत्यंत पवित्र मानली जाणारी तिथी म्हणजे पुद्ध पौर्णिमा. वैशाख पौर्णिमा बुद्ध पौर्णिमा म्हणून ओळखली जाते. बुद्ध पौर्णिमा आणखी तीन कारणांसाठी विशेष आहे. ती म्हणजे, याच दिवशी गौतम बुद्धांचा जन्म झाला. याच दिवशी बुद्धांना ज्ञानप्राप्ती झाली होती आणि याच दिवशी बुद्धांचे महानिर्वाण झाले होते, असे सांगितले जाते. बुद्धांच्या हस्तमुद्रेतून जीवनातील विविध घटकांना दर्शवण्यात आले आहे. बुद्धांच्या हस्तमुद्रांची नावे काय? त्यामागे नेमका कोणता अर्थ दडलाय? जाणून घेऊया...         Ad बौद्ध धर्मीयांसाठी अत्यंत पवित्र मानली जाणारी तिथी म्हणजे पुद्ध पौर्णिमा. वैशाख पौर्णिमा बुद्ध पौर्णिमा म्हणून ओळखली जाते. बुद्ध पौर्णिमा आणखी तीन कारणांसाठी विशेष आहे. ती म्हणजे, याच दिवशी गौतम बुद्धांचा जन्म झाला. याच दिवशी बुद्धांना ज्ञानप्राप्ती झाली होती आणि याच दिवशी बुद्धांचे महानिर्वाण झाले होते, असे सांगितले जाते. गौतम बुद्ध हे ज्ञ...