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Showing posts from September, 2020

जब भगवान बुद्ध ने दी... ...जब भगवान बुद्ध ने दी अपने ही शिष्य को मांस खाने की इजाजत

...जब भगवान बुद्ध ने दी... ...जब भगवान बुद्ध ने दी अपने ही शिष्य को मांस खाने की इजाजत  भिक्षु गौतम के पास आए और कहा, ‘देखिए, आपने हमसे कहा था कि हमें मांस नहीं खाना चाहिए।  बात उन दिनों की है जब गौतम बुद्ध के पास जो भी आता उसे भिक्षु बनने की दीक्षा मिल जाती थी। आने वालों में बहुत से लोग राजा थे या ऐसे समुदायों से आते थे, जहां मांस खाना सामान्य बात थी, क्योंकि वे शिकारी थे। बुद्ध ने इसलिए एक नियम बना दिया कि भिक्षु मांस नहीं खाएंगे। एक दिन दो भिक्षु शहर में भिक्षा मांगने गए पर उन्हें कुछ नहीं मिला। भिक्षुओं को जो कुछ भी मिलता सभी आकर भोजन को बुद्ध के चरणों में रख देते थे। वह उस भोजन को सभी को बांट देते थे। बिना भिक्षा के दोनों भिक्षु लौट रहे थे। उसी समय उड़ते हुए एक कौवे के पंजों से छूटकर मांस का टुकड़ा सीधा आकर भिक्षु के पात्र में गिरा। भिक्षु गौतम के पास आए और कहा, ‘देखिए, आपने हमसे कहा था कि हमें मांस नहीं खाना चाहिए, हमें उससे कोई ऐतराज नहीं है लेकिन आपने हमसे यह भी कहा था कि भिक्षु को यह नहीं देखना चाहिए कि वह क्या खा रहा है जो भी मिले, उसे खा लेना चाहिए। अब हमारे पात्र म...

जब सरेआम एक शख्स ने गौतम बुद्ध को कहा पाखंडी

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जब सरेआम एक शख्स ने गौतम बुद्ध को कहा पाखंडी गौतम बुद्ध एक गांव में उपदेश दे रहे थे। By - टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली Update: 2017-07-21 08:45 GMT तुलसीदास जी ने बहुत सटीक कहा है कि बीती ताहि बिसार दे, आगे की सुधि लेय। भूतकाल के बारे में सोचने से समय के नाश के अलावा कुछ नहीं होता। गौतम बुद्ध एक गांव में उपदेश दे रहे थे। ये भी पढ़ें  . ..जब भगवान बुद्ध ने दी अपने ही शिष्य को मांस खाने की इजाजत वहां स्वभाव से ही अतिक्रोधी एक व्यक्ति भी बैठा हुआ था। वह कुछ देर बाद अचानक ही आग- बबूला होकर बुद्ध से बोलने लगा, तुम पाखंडी हो, बड़ी-बड़ी बातें करना यही तुम्हारा काम है, तुम लोगों को भ्रमित कर रहे हो, तुम्हारी ये बातें आज के समय में कोई मायने नहीं रखतीं। ऐसे कई कटु वचन सुनकर भी बुद्ध शांत रहे। उसकी बातों से न दुखी हुए, न ही कोई प्रतिक्रिया की, यह देखकर वह व्यक्ति और भी क्रोधित हो गया और वह और बुरा बर्ताव कर वहां से चला गया। अगले दिन जब उस व्यक्ति का क्रोध शांत हुआ तो उसे अपने बुरे व्यवहार के कारण पछतावे की आग में जलने लगा। वह उन्हें ढूंढते हुए उसी स्थान पर पहुंचा, पर बुद्ध कहां मिलते वह तो अपने ...

जब भरी सभा में हुआ गौतम बुद्ध का अपमान

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जब भरी सभा में हुआ गौतम बुद्ध का अपमान गौतम बुद्ध ने शिष्यों के साथ कुरु नगर में प्रवेश किया तो रानी के सेवकों ने अपशब्द कहे। By - टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली Update: 2017-07-28 08:28 GMT गौतम बुद्ध  का मूल मंत्र था कि अपमान पर उत्तेजित होने की बजाय स्वयं को संतुलित रखना ही बुद्धिमानी है। एक बार वे कुरु नगर गए। वहां की रानी के बारे में लोगों का कहना था कि वह बहुत क्रूर है। ये भी पढ़ें-  भगवान बुद्ध ने बताया था अपने भाग्य को पहचानने का रास्ता जब रानी को पता चला कि  गौतम बुद्ध  कुरु आ रहे हैं तो उसने सेवकों से उनका अनादर करने के लिए कहा। गौतम बुद्ध ने शिष्यों के साथ कुरु नगर में प्रवेश किया तो रानी के सेवकों ने अपशब्द कहे, लेकिन बुद्ध शांत रहे। यह बात उनके शिष्य आनंद को अच्छी नहीं लगी। वह उनसे बोले, 'हमें यहां से किसी ऐसे स्थान पर चले जाना चाहिए, जहां कोई हमारे साथ दुर्व्‍यवहार न करे।'   बुद्ध ने कहा, 'यह जरूरी नहीं है कि हम जहां जाएंगे, वहां हमारा आदर हो, लेकिन यदि कोई अनादर कर रहा है तो उस स्थान को तब तक नहीं छोड़ना चाहिए जब तक वहां शांति स्थापित न हो जाए।' ...

भगवान बुद्ध ने बताया था अपने भाग्य को पहचानने का रास्ता

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भगवान बुद्ध ने बताया था अपने भाग्य को पहचानने का रास्ता जीवन में तरक्की पाने के लिए जरूर पढ़ें। By - टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली Update: 2017-07-26 08:30 GMT एक बार बुद्ध कहीं प्रवचन दे रहे थे। अपनी देशना खत्म करते हुए उन्होंने आखिर में कहा, जागो, समय हाथ से निकला जा रहा है। सभा विसर्जित होने के बाद उन्होंने अपने प्रिय शिष्य आनंद से कहा, चलो थोड़ी दूर घूम कर आते हैं। ये भी पढ़ें-  ...जब भगवान बुद्ध ने दी अपने ही शिष्य को मांस खाने की इजाजत आनंद बुद्ध के साथ चल दिए। अभी वे विहार के मुख्य द्वार तक ही पहुंचे थे कि एक किनारे रुक कर खड़े हो गए। प्रवचन सुनने आए लोग एक-एक कर बाहर निकल रहे थे, इसलिए भीड़ सी हो गई थी। अचानक उसमें से निकल कर एक स्त्री गौतम बुद्ध से मिलने आई। उसने कहा, तथागत मैं नर्तकी हूँ। आज नगर के श्रेष्ठी के घर मेरे नृत्य का कार्यक्रम पहले से तय था, लेकिन मैं उसके बारे में भूल चुकी थी। आपने कहा, समय निकला जा रहा है तो मुझे तुरंत इस बात की याद आई। धन्यवाद तथागत! उसके बाद एक डकैत बुद्ध की ओर आया। उसने कहा, तथागत मैं आपसे कोई बात छिपाऊंगा नहीं। मैं भूल गया था कि आज मुझे एक जगह ड...

भगवान बुद्ध ने क्यों नहीं दिए थे इन 14 प्रश्नों के उत्तर?

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भगवान बुद्ध ने क्यों नहीं दिए थे इन 14 प्रश्नों के उत्तर? कहते हैं कि लव-कुश की पीढ़ी में शाक्य , शाक्य से शुद्धोधन और शुद्धोधन से सिद्धार्थ का जन्म हुआ।  यह सिद्धार्थ ही आगे चलकर गौतम बुद्ध ने नाम से प्रसिद्ध हुए।  गौतम बुद्ध के दर्शन में अनीश्वरवाद , अनात्मवाद और क्षणिकवाद को महत्व दिया जाता है।  उनका मानना था कि संबुद्ध होना ही सत्य है। इसके लिए ही उन्होंने आष्टांगिक मार्ग बताएं हैं।     गौतम बुद्ध से उनके जीवन में लाखों प्रश्न पूछे गए लेकिन उनमें से 14 प्रश्नों के उन्होंने जवाब नहीं दिए।   जब भगवान बुद्ध से जीव, जगत आदि के विषय में चौदह दार्शनिक प्रश्न किए जाते थे तो वे सदा मौन रह जाते थे। ये प्रसिद्ध चौदह प्रश्न नि‍म्नांकित हैं-     👉1-4. क्या लोक शाश्वत है? अथवा नहीं? अथवा दोनों? अथवा दोनों नहीं?   👉5-8. क्या जगत नाशवान है? अथवा नहीं? अथवा दोनों? अथवा दोनों नहीं?  👉9-11. तथागत देह त्याग के बाद भी विद्यमान रहते हैं? अथवा नहीं? अथवा दोनों? अथवा दोनों नहीं?   👉11-14. क्या जीव और शरीर एक हैं? अथवा भिन्न?   ...

एक थी सुजाता: बुद्ध को खीर खिलाने के अलावा भी बौद्ध ग्रंथों में जिक्र है सुजाता का

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एक थी सुजाता एक थी सुजाता: बुद्ध को खीर खिलाने के अलावा भी बौद्ध ग्रंथों में जिक्र है सुजाता का ध्रुव गुप्त बौद्धकालीन सुजाता को हम बस उस स्त्री के रूप में जानते हैं जिसने कठोर तप के कारण मरणासन्न बुद्ध को खीर खिलाकर उन्हें नया जीवन और जीवन के प्रति संतुलित दृष्टि दी थी. इसके अतिरिक्त भी बौद्ध-ग्रंथों में सुजाता के जीवन और अंत के बारे में बहुत कुछ है जिससे ज्यादा लोग परिचित नहीं हैं. सुजाता बोधगया के पास सेनानी ग्राम के एक धनी व्यक्ति अनाथपिण्डिका की पुत्रवधू थी. अत्यंत अहंकारी, वाचाल और उद्दंड.  उसने मनौती मांगी थी कि पुत्र होने के बाद वह गांव के निकट के वृक्ष-देव को  खीर चढाएगी. पुत्र की प्राप्ति के बाद उसने अपनी दासी पूर्णा को वृक्ष और उसके आसपास की जगह की सफाई के लिए भेजा. पूर्णा वृक्ष नीचे बैठे कृशकाय बुद्ध को वृक्ष का देवता समझ बैठी और भागती हुई अपनी स्वामिनी को बुलाने गयी. सुजाता ने तत्काल वहां पहुंचकर सोने की कटोरी में बुद्ध को खीर और शहद अर्पण करते हुए कहा- ‘जैसे मेरी पूरी हुई, आपकी भी मनोकामना पूरी हो.’ मरणासन्न बुद्ध ने नदी में स्नान के बाद खीर का सेवन कर उनचास दिनो...

अव्दैत का विस्तार और संसार ध्रुव शुक्ल

अव्दैत का विस्तार और संसार ध्रुव शुक्ल कभी विकल होकर कहने का मन होता है कि अव्दैत की धारणा कुछ विरले ज्ञानियों की ज़िद है और संसार को देखकर लगता है कि वह व्दैत में ही जीने की जिद बांधो हुए है। कोई उत्प्रेरक जरूर है जिसके कारण इतना बड़ा जीवन व्यापार चल रहा है पर विरले ज्ञानियों की नजर में इस उत्प्रेरक पर संसार की छाया तक नहीं पड़ती। संसार तो ऐसी देह भर है जो इस उत्प्रेरक से विच्छिन्न होकर पृथ्वी पर आ गिरी है। अब जो भी इस देह का कार्य है उसका कारण भी यही देह है, वह अपनी जिम्मेदारी किसी अजन्में स्रष्टा पर नहीं डाल सकती। अपने जरा-मरण के लिए वह खुद ही जिम्मेदार है। अश्वघोष-कृत -- बुध्दचरित का पाठ करता हूँ और सामना करता हूँ कि सचमुच में वह क्या है जिसका होना जरा-मरण का कारण है और बुध्द उत्तर देते हैं कि जन्म से जरा-मरण की उत्पत्ति होती है और जन्म कर्मभव से होता है क्योंकि प्रवृत्ति कर्म से ही होती है, किसी स्रष्टा से नहीं। कर्मभव का कारण उस काम नामक उपादान में है जो तृष्णा के कारण सक्रिय हो उठता है और तृष्णा का कारण वेदना है। वेदना का कारण स्पर्श है -- वस्तु, इंद्रिय और मन का संयोग - जिससे वेदन...

राजकुमारी यशोधरा

राजकुमारी यशोधरा राजकुमारी यशोधरा  (563 ईसा पूर्व - 483 ईसा पूर्व) राजा सुप्पबुद्ध और उनकी पत्नी पमिता की पुत्री थीं। यशोधरा की माता- पमिता राजा  शुद्धोदन  की बहन थीं। 16 वर्ष की आयु में यशोधरा का विवाह राजा शुद्धोदन के पुत्र  सिद्धार्थ गौतम  के साथ हुआ। बाद में सिद्धार्थ गौतम संन्यासी हुए और  गौतम बुद्ध  के नाम से प्रसिद्ध हुए। यशोधरा ने 29 वर्ष की आयु में एक पुत्र को जन्म दिया जिसका नाम राहुल था। अपने पति गौतम बुद्ध के संन्यासी हो जाने के बाद यशोधरा ने अपने बेटे का पालन पोषण करते हुए एक संत का जीवन अपना लिया। उन्होंने मूल्यवान वस्त्राभूषण का त्याग कर दिया। पीला वस्त्र पहना और दिन में एक बार भोजन किया। जब उनके पुत्र राहुल ने भी सन्न्यास अपनाया तब वे भी सन्न्यासिनि हो गईं। इनका देहावसान 78 वर्ष की आयु में गौतम बुद्ध के निर्वाण से 2 वर्ष पहले हुआ। यशोधरा के जीवन पर आधारित बहुत सी रचनाएँ हुई हैं, जिनमें  मैथिलीशरण गुप्त  की रचना  यशोधरा (काव्य)  बहुत प्रसिद्ध है। एक आदर्श नारी यशोधरा का विरह अत्यंत दारुण है और सिद्धि मार्ग की बाधा समझ...

सिद्धार्थ

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सिद्धार्थ    संक्षिप्त परिचय सिद्धार्थ अन्य नाम सिद्धार्थ , गौतम बुद्ध, महात्मा बुद्ध, शाक्य मुनि अवतार भगवान विष्णु  के  दस अवतारों  में नौवें अवतार पिता राजा शुद्धोदन माता रानी महामाया जन्म विवरण 563 ईसा पूर्व,  लुम्बिनी  ( कपिलवस्तु ) धर्म-संप्रदाय बौद्ध धर्म-  ' थेरवाद ', ' महायान ', ' वज्रयान ' विवाह यशोधरा संतान राहुल शासन-राज्य शाक्य गणराज्य अन्य विवरण बौद्ध धर्म को पैंतीस करोड़ से अधिक लोग मानते हैं और यह दुनिया का चौथा सबसे बड़ा  धर्म  है। मृत्यु 483 ईसा पूर्व,  कुशीनगर  (आयु- 80 वर्ष) संबंधित लेख सारनाथ ,  सांकाश्य ,  कौशांबी ,  वैरंजा ,  कान्यकुब्ज जयंती वैशाख  की  पूर्णिमा  ( बुद्ध पूर्णिमा ) अंतिम शब्द "हे भिक्षुओं, इस समय आज तुमसे इतना ही कहता हूँ कि जितने भी  संस्कार  हैं, सब नाश होने वाले हैं, प्रमाद रहित हो कर अपना कल्याण करो।" [1] अन्य जानकारी मथुरा  में अनेक बौद्ध कालीन मूर्तियाँ मिली हैं। जो  मौर्य काल  और  कुषाण काल  में मथुरा की अति उन्न...

गौतम बुद्ध

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 गौतम बुद्ध बुद्ध विषय सूची बुद्ध  को 'गौतम बुद्ध', 'महात्मा बुद्ध' आदि नामों से भी जाना जाता है। वे संसार प्रसिद्ध  बौद्ध धर्म  के संस्थापक माने जाते हैं। बौद्ध धर्म  भारत  की श्रमण परम्परा से निकला  धर्म  और  दर्शन  है। आज बौद्ध धर्म सारे संसार के चार बड़े धर्मों में से एक है। इसके अनुयायियों की संख्या दिन-प्रतिदिन आज भी बढ़ रही है। इस धर्म के संस्थापक बुद्ध राजा शुद्धोदन के पुत्र थे और इनका जन्म स्थान  लुम्बिनी  नामक ग्राम था। वे छठवीं से पाँचवीं शताब्दी ईसा पूर्व तक जीवित थे। उनके गुज़रने के बाद अगली पाँच शताब्दियों में, बौद्ध धर्म पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में फैल गया और अगले दो हज़ार सालों में मध्य, पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी जम्बू महाद्वीप में भी फैल गया। आज बौद्ध धर्म में तीन मुख्य सम्प्रदाय हैं- ' थेरवाद ', ' महायान ' और ' वज्रयान '। बौद्ध धर्म को पैंतीस करोड़ से अधिक लोग मानते हैं और यह दुनिया का चौथा सबसे बड़ा  धर्म  है। जीवन परिचय जन्म गौतम बुद्ध का मूल नाम  ' सिद्धार्थ ' था। सिंहली, अनुश्रुति,  खारवेल...

आलार कलाम

आलार कलाम    आलार कलाम  ( अंग्रेज़ी :  Alara Kalama )  बुद्ध  के समकालीन एक दार्शनिक एवं योगी थे। वे  सांख्य दर्शन  के विशेषज्ञ थे।  पालि  ग्रन्थों के अनुसार वे  गौतम बुद्ध  के प्रथम गुरु थे। छ:वर्षों तक आलार कलाम के पास रहकर बुद्ध ने सांख्य मार्ग तथा समाधि मार्ग का उचित अध्ययन किया था। गौतम बुद्ध के समय समाज में सांख्य दर्शन का काफी प्रभाव था और इससे बुद्ध भी काफी प्रभावित थे। उनकी भी इच्‍छा थी कि सांख्य दर्शन का अध्ययन करें। इसलिए वे  वैशाली  के आश्रम में जा पहुंंचे, जहाँ (गोंड़ी) धर्म के (आदिवासियों) के पहले धर्मगुरु (पारी कूपार लिंगो संस्थापक) के बारहवें गोंड़ी धर्म गुरु (उत्तराधिकारी) आलार कलाम लिंगो रहते थे। आलार कलाम ने बुद्ध को न सिर्फ सांख्य दर्शन की शिक्षा दी, बल्कि उन्हें ध्यान मार्ग के सिद्धान्त तथा समाधि मार्ग का ज्ञान भी प्रदान किया। स्वयं आलार कलाम भी ध्यानाचार्य के रूप में कौशल जनपद में प्रसिद्ध थे। छ:वर्षों तक आलार कलाम के पास रहकर  बुद्ध  ने सांख्य मार्ग तथा समाधि मार्ग का उचित अध्ययन किया ...

बुद्ध

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  बुद्ध बुद्ध विषय सूची बुद्ध  को 'गौतम बुद्ध', 'महात्मा बुद्ध' आदि नामों से भी जाना जाता है। वे संसार प्रसिद्ध  बौद्ध धर्म  के संस्थापक माने जाते हैं। बौद्ध धर्म  भारत  की श्रमण परम्परा से निकला  धर्म  और  दर्शन  है। आज बौद्ध धर्म सारे संसार के चार बड़े धर्मों में से एक है। इसके अनुयायियों की संख्या दिन-प्रतिदिन आज भी बढ़ रही है। इस धर्म के संस्थापक बुद्ध राजा शुद्धोदन के पुत्र थे और इनका जन्म स्थान  लुम्बिनी  नामक ग्राम था। वे छठवीं से पाँचवीं शताब्दी ईसा पूर्व तक जीवित थे। उनके गुज़रने के बाद अगली पाँच शताब्दियों में, बौद्ध धर्म पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में फैल गया और अगले दो हज़ार सालों में मध्य, पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी जम्बू महाद्वीप में भी फैल गया। आज बौद्ध धर्म में तीन मुख्य सम्प्रदाय हैं- ' थेरवाद ', ' महायान ' और ' वज्रयान '। बौद्ध धर्म को पैंतीस करोड़ से अधिक लोग मानते हैं और यह दुनिया का चौथा सबसे बड़ा  धर्म  है। जीवन परिचय जन्म गौतम बुद्ध का मूल नाम  ' सिद्धार्थ ' था। सिंहली, अनुश्रुति,  खारवेल ...