भगवान बुद्ध ने बताया था अपने भाग्य को पहचानने का रास्ता
भगवान बुद्ध ने बताया था अपने भाग्य को पहचानने का रास्ता
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Update: 2017-07-26 08:30 GMT

एक बार बुद्ध कहीं प्रवचन दे रहे थे। अपनी देशना खत्म करते हुए उन्होंने आखिर में कहा, जागो, समय हाथ से निकला जा रहा है। सभा विसर्जित होने के बाद उन्होंने अपने प्रिय शिष्य आनंद से कहा, चलो थोड़ी दूर घूम कर आते हैं।
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आनंद बुद्ध के साथ चल दिए। अभी वे विहार के मुख्य द्वार तक ही पहुंचे थे कि एक किनारे रुक कर खड़े हो गए। प्रवचन सुनने आए लोग एक-एक कर बाहर निकल रहे थे, इसलिए भीड़ सी हो गई थी।
अचानक उसमें से निकल कर एक स्त्री गौतम बुद्ध से मिलने आई। उसने कहा, तथागत मैं नर्तकी हूँ। आज नगर के श्रेष्ठी के घर मेरे नृत्य का कार्यक्रम पहले से तय था, लेकिन मैं उसके बारे में भूल चुकी थी। आपने कहा, समय निकला जा रहा है तो मुझे तुरंत इस बात की याद आई। धन्यवाद तथागत!
उसके बाद एक डकैत बुद्ध की ओर आया। उसने कहा, तथागत मैं आपसे कोई बात छिपाऊंगा नहीं। मैं भूल गया था कि आज मुझे एक जगह डाका डालने जाना था कि आपने कहा जागो समय निकला जा रहा है तो यह सुनते ही मुझे अपनी योजना याद आ गई।
बहुत बहुत धन्यवाद!” उसके जाने के एक बूढ़ा व्यक्ति बुद्ध के पास आया। वृद्ध ने कहा, तथागत! जिन्दगी भर दुनियावी चीजों के पीछे भागता रहा। अब मौत का सामना करने का दिन नजदीक आता जा रहा है। आपने कहा जागो, समय निकला जा रहा है। तब मुझे लगा कि सारी जिन्दगी यूँ ही बेकार हो गई। आपकी बातों से आज मेरी आंखें खुल गईं।
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आज से मैं अपने सारे दुनियावी मोह छोड़कर निर्वाण के लिए कोशिश करूंगा। जब सब लोग चले गये तो बुद्ध ने कहा, देखो आनंद! प्रवचन मैंने एक ही दिया, लेकिन उसका हर किसी ने अलग-अलग मतलब निकाला।
जिसकी जितनी झोली होती है, उतना ही दान वह समेट पाता है। निर्वाण प्राप्ति के लिए भी मन की झोली को उसके लायक होना होता है। इसके लिए मन का साफ़ होना बहुत जरुरी है।
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