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Showing posts from January, 2022

महाजनपद काल - एक सम्पूर्ण यात्रा (भाग-15)-अवंती महाजनपद

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महाजनपद काल - एक सम्पूर्ण यात्रा (भाग-15)-अवंती महाजनपद   महाजनपद काल - एक सम्पूर्ण यात्रा (भाग-15)-अवंती महाजनपद (Mahajanpada Period-Avanti Mahajanpada) *अवंती, पौराणिक 16 महाजनपदों में से एक था। *आधुनिक मालवा का प्रदेश जिसकी राजधानी उज्जयिनी और महिष्मति थी। *यह महाजनपद दो भागों में विभाजित था। *उत्तरी भाग की राजधानी उज्जयिनी और दक्षिणी भाग की राजधानी महिष्मति थी। *उज्जयिनी (उज्जैन) मध्य प्रदेश राज्य का एक प्रमुख शहर है। प्राचीन संस्कृत तथा पाली साहित्य में अवंती या उज्जयिनी का सैंकड़ों बार उल्लेख हुआ है। *महाभारत में सहदेव द्वारा अवंती को विजित करने का वर्णन है। *बौद्ध काल में अवंती उत्तरभारत के शोडश महाजनपदों में से थी जिनकी सूची अंगुत्तरनिकाय में हैं। *जैन ग्रंथ भगवती सूत्र में इसी जनपद को मालव कहा गया है। इस जनपद में स्थूल रूप से वर्तमान मालवा, निमाड़ और मध्य प्रदेश का बीच का भाग सम्मिलित था। *पुराणों के अनुसार अवंती की स्थापना यदुवंशी क्षत्रियों द्वारा की गई थी। *पुराणों के अनुसार पुणिक नामक सेनापति ने यदुवंशीय वीतिहोत्र नामक शासक की हत्या करके अपने पुत्र प्रद्योत को अवन्ति क...

महाजनपद काल - एक सम्पूर्ण यात्रा (भाग-14)-अश्मक महाजनपद

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महाजनपद काल - एक सम्पूर्ण यात्रा (भाग-14)-अश्मक महाजनपद   महाजनपद काल - एक सम्पूर्ण यात्रा (भाग-14)-अश्मक महाजनपद (Mahajanpada Period-Ashmak Mahajanpada) अश्मक अथवा अस्सक महाजनपद पौराणिक 16 महाजनपदों में से एक था। *नर्मदा और गोदावरी नदियों के बीच अवस्थित इस प्रदेश की राजधानी 'पाटन' थी। *आधुनिक काल में इस प्रदेश को महाराष्ट्र कहते हैं। *दक्षिण भारत में स्थित यह एकमात्र जनपद था। *पुराणों के अनुसार इस महाजनपद के शासक इक्ष्वाकु वंश के थे। *अवंति ने बाद में अश्मक को जीत लिया था। *बौद्ध साहित्य में इस प्रदेश का उल्लेख मिलता है, जो गोदावरी के तट पर स्थित था। स्थिति- *'महागोविन्दसूत्तन्त' के अनुसार यह प्रदेश रेणु और धृतराष्ट्र के समय में विद्यमान था। इस ग्रन्थ में अस्सक के राजा ब्रह्मदत्त का उल्लेख है। *सुत्तनिपात में अस्सक को गोदावरी तट पर स्थित बताया गया है। *इसकी राजधानी पोतन, पौदन्य या पैठान में थी। *पाणिनि ने अष्टाध्यायी में भी अश्मकों का उल्लेख किया है। *सोननंदजातक में अस्सक को अवंती से सम्बंधित कहा गया है। *अश्मक नामक राजा का उल्लेख वायु पुराण और महाभारत में है--'अश्...

महाजनपद काल - एक सम्पूर्ण यात्रा (भाग-13)-मत्स्य महाजनपद

महाजनपद काल - एक सम्पूर्ण यात्रा (भाग-13)-मत्स्य महाजनपद  महाजनपद काल - एक सम्पूर्ण यात्रा (भाग-13)-मत्स्य महाजनपद (Mahajanpada Period-Matsya Mahajanpada) मत्स्य महाजनपद- *मत्स्य 16 महाजनपदों में से एक है। *इसमें राजस्थान के अलवर, भरतपुर तथा जयपुर ज़िले के क्षेत्र शामिल थे। *महाभारत काल का एक प्रसिद्ध जनपद जिसकी स्थिति अलवर-जयपुर के परिवर्ती प्रदेश में मानी गई है। *इस देश में विराट का राज था तथा वहाँ की राजधानी उपप्लव नामक नगर में थी। *विराट नगर मत्स्य देश का दूसरा प्रमुख नगर था। दिग्विजय यात्रा- *सहदेव ने अपनी दिग्विजय-यात्रा में मत्स्य देश पर विजय प्राप्त की थी। *भीम ने भी मत्स्यों को विजित किया था। *अलवर के एक भाग में शाल्व देश था जो मत्स्य का पार्श्ववती जनपद था। *पांडवों ने मत्स्य देश में विराट के यहाँ रह कर अपने अज्ञातवास का एक वर्ष बिताया था। ऋग्वेद में उल्लेख- *मत्स्य निवासियों का सर्वप्रथम उल्लेख ऋग्वेद में है। *इस उद्धरण में मत्स्यों का वैदिक काल के प्रसिद्ध राजा सुदास के शत्रुओं के साथ उल्लेख है। ग्रन्थों में उल्लेख- शतपथ ब्राह्मण में मत्स्य-नरेश ध्वसन द्वैतवन का उल्लेख ह...

महाजनपद काल - एक सम्पूर्ण यात्रा (भाग-11)-वज्जि महाजनपद

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महाजनपद काल - एक सम्पूर्ण यात्रा (भाग-11)-वज्जि महाजनपद   महाजनपद काल - एक सम्पूर्ण यात्रा (भाग-11)-वज्जि महाजनपद (Mahajanpada Period-Vajji Mahajanpada) वज्जि या वृजि प्राचीन भारत के 16 महाजनपदों में से एक था।यह महाजनपद मगध के उत्तर में स्थित था।कई छोटे राज्यों को मिलाकर इसकी उत्पत्ति हुई थी,यह संघ आठ कुलों के संयोंग से बना और इनमें चार (विदेह, ज्ञातृक, वज्जि और लिच्छवि) कुल अधिक प्रमुख थे । इसकी राजधानी वैशाली थी। वज्जि के गणराज्य बनने के बाद इसका राज्य-संचालन अष्टकुल द्वारा होने लगा। वज्जि गणराज्य - *उत्तर बिहार का बौद्ध कालीन गणराज्य जिसे बौद्ध साहित्य में वृज्जि कहा गया है। *वास्तव में यह गणराज्य एक राज्य-संघ था जिसके आठ अन्य सदस्य (अट्ठकुल) थे जिनमें विदेह, लिच्छवी तथा ज्ञातृकगण प्रसिद्ध थे। *वृजियों का उल्लेख पाणिनि ने दिया है। *कौटिल्य अर्थशास्त्र में वृजिकों को लिच्छविकों से भिन्न बताया गया है और वृजियों के संघ का भी उल्लेख किया गया है। *युवानच्वांग ने भी वृज्जि देश को वैशाली से अलग बताया है किन्तु फिर भी वृजियों का वैशाली से निकट सम्बन्ध था। *बुद्ध के जीवनकाल में मगध सम्रा...

महाजनपद काल - एक सम्पूर्ण यात्रा (भाग-12)-चेदि महाजनपद

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महाजनपद काल - एक सम्पूर्ण यात्रा (भाग-12)-चेदि महाजनपद   महाजनपद काल - एक सम्पूर्ण यात्रा (भाग-12)-चेदि महाजनपद (Mahajanpada Period-Chedi Mahajanpada) चेदि या चेति महाजनपद- *पौराणिक 16 महाजनपदों में से एक था। *यह शुक्तिमती नदी के पास का देश था, जिसमें बुंदेलखंड का दक्षिणी भाग और जबलपुर का उत्तरी भाग सम्मिलित था। *बौद्ध ग्रंथों में जिन सोलह महाजनपदों का उल्लेख है उनमें यह भी था। कलिचुरि वंश ने भी यहाँ राज्य किया। *किसी समय शिशुपाल यहाँ का प्रसिद्ध राजा था। *उसका विवाह रुक्मिणी से होने वाला था कि श्रीकृष्ण ने रूक्मणी का हरण कर दिया इसके बाद ही जब युधिष्ठर के राजसूय यज्ञ में श्रीकृष्ण को पहला स्थान दिया तो शिशुपाल ने उनकी घोर निंदा की। *इस पर श्रीकृष्ण ने उसका वध कर डाला। *मध्य प्रदेश का ग्वालियर क्षेत्र में वर्तमान चंदेरी क़स्बा ही प्राचीन काल के चेदि राज्य की राजधानी बताया जाता है। अन्य तथ्य- *ऋग्वेद में चेदि नरेश कशुचैद्य का उल्लेख है । *रैपसन के अनुसार कशु या कसु महाभारत में वर्णित चेदिराज वसु है और इन्द्र के कहने से उपरिचर राजा वसु ने रमणीय चेदि देश का राज्य स्वीकार किया था। *महा...

महाजनपद काल - एक सम्पूर्ण यात्रा (भाग-10)-मगध महाजनपद

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महाजनपद काल - एक सम्पूर्ण यात्रा (भाग-10)-मगध महाजनपद   महाजनपद काल - एक सम्पूर्ण यात्रा (भाग-10)-मगध महाजनपद (Mahajanpada Period-Magadh Mahajanpada) मगध प्राचीन भारत के सोलह महाजनपद में से एक था । बौद्ध काल तथा परवर्तीकाल में उत्तरी भारत का सबसे अधिक शक्तिशाली जनपद था। इसकी स्थिति स्थूल रूप से दक्षिण बिहार के प्रदेश में थी। आधुनिक पटना तथा गया ज़िला इसमें शामिल थे । इसकी राजधानी गिरिव्रज थी । भगवान बुद्ध के पूर्व बृहद्रथ तथा जरासंध यहाँ के प्रतिष्ठित राजा थे । अभी इस नाम से बिहार में एक प्रमंडल है - मगध प्रमंडल। मगध का सर्वप्रथम उल्लेख अथर्ववेद में मिलता है । इससे सूचित होता है कि प्राय: उत्तर वैदिक काल तक मगध, आर्य सभ्यता के प्रभाव क्षेत्र के बाहर था। अभियान चिन्तामणि के अनुसार मगध को कीकट कहा गया है । मगध बुद्धकालीन समय में एक शक् ‍ तिशाली राजतन्त्रों में एक था । यह दक्षिणी बिहार में स्थित था जो कालान्तर में उत्तर भारत का सर्वाधिक शक् ‍ तिशाली महाजनपद बन गया । यह गौरवमयी इतिहास और राजनीतिक एवं धार्मिकता का विश् ‍ व केन्द्र बन गया । मगध महाजनपद की सीमा उत्तर में गंगा से दक्षिण मे...

महाजनपद काल - एक सम्पूर्ण यात्रा (भाग-9)-अंग महाजनपद

महाजनपद काल - एक सम्पूर्ण यात्रा (भाग-9)-अंग महाजनपद  महाजनपद काल - एक सम्पूर्ण यात्रा (भाग-9)-अंग महाजनपद (Mahajanpada Period-Anga Mahajanpada) अंग प्राचीन भारत के 16 महाजनपदों में से एक था। इसका सर्वप्रथम उल्लेख अथर्ववेद में मिलता है। बौद्ध ग्रंथो में अंग और वंग को प्रथम आर्यों की संज्ञा दी गई है। महाभारत के साक्ष्यों के अनुसार आधुनिक भागलपुर, मुंगेर और उससे सटे बिहार और बंगाल के क्षेत्र अंग प्रदेश के क्षेत्र थे। इस प्रदेश की राजधानी चम्पापुरी थी।यह महाजनपद मगध राज्य के पूर्व में स्थित था, प्रारंभ में इस जनपद के राजाओं ने ब्रह्मदत्त के सहयोग से मगध के कुछ राजाओं को पराजित भी किया था किंतु कालांतर में इनकी शक्ति क्षीण हो गई और इन्हें मगध से पराजित होना पड़ा। महाभारत काल में यह कर्ण का राज्य था। इसका प्राचीन नाम मालिनी था। इसके प्रमुख नगर चम्पा (बंदरगाह), अश्वपुर थे। अंग की राजधानी चंपा थी। आज भी भागलपुर के एक मुहल्ले का नाम चंपानगर है। राजा दशरथ के मित्र लोमपाद और महाभारत के अंगराज कर्ण ने वहाँ राज किया था। बौद्ध ग्रंथ 'अंगुत्तरनिकाय' में भारत के बुद्ध पूर्व सोलह जनपदों में अं...

महाजनपद काल - एक सम्पूर्ण यात्रा (भाग-8)-काशी महाजनपद

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महाजनपद काल - एक सम्पूर्ण यात्रा (भाग-8)-काशी महाजनपद   महाजनपद काल - एक सम्पूर्ण यात्रा (भाग-8)-काशी महाजनपद (Mahajanpada Period-Kashi Mahajanpada) काशी महाजनपद *इसकी राजधानी वाराणसी (बनारस) थी. काशी के कौसल, मगध और अंग राज्यों से सम्बन्ध अच्छे नहीं रहे और प्रायः उसे उनसे संघर्षरत रहना पड़ा, गौतम बुद्ध के समय में काशी राज्य का राजनैतिक पतन हो गया। *पौराणिक 16 महाजनपदों में से एक। वाराणसी का दूसरा नाम ‘काशी’ प्राचीन काल में एक जनपद के रूप में प्रख्यात था और वाराणसी उसकी राजधानी थी। *इसकी पुष्टि पाँचवीं शताब्दी में भारत आने वाले चीनी यात्री फ़ाह्यान के यात्रा विवरण से भी होती है। *हरिवंशपुराण में उल्लेख आया है कि ‘काशी’ को बसाने वाले पुरुरवा के वंशज राजा ‘काश’ थे। अत: उनके वंशज ‘काशि’ कहलाए।संभव है इसके आधार पर ही इस जनपद का नाम ‘काशी’ पड़ा हो। *काशी नामकरण से संबद्ध एक पौराणिक मिथक भी उपलब्ध है। उल्लेख है कि विष्णु ने पार्वती के मुक्तामय कुंडल गिर जाने से इस क्षेत्र को मुक्त क्षेत्र की संज्ञा दी और इसकी अकथनीय परम ज्योति के कारण तीर्थ का नामकरण काशी किया। वाराणसी- वाराणसी, बनारस या ...

महाजनपद काल - एक सम्पूर्ण यात्रा (भाग-7)-मल्ल महाजनपद

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महाजनपद काल - एक सम्पूर्ण यात्रा (भाग-7)-मल्ल महाजनपद   महाजनपद काल - एक सम्पूर्ण यात्रा (भाग-7)-मल्ल महाजनपद (Mahajanpada Period-Malla Mahajanpada) मल्ल महाजनपद पौराणिक 16 महाजनपदों में से एक था। यह भी एक गणसंघ था और पूर्वी उत्तर प्रदेश के इलाके इसके क्षेत्र थे। यह जनपद वज्जि संघ के उत्तर में स्थित एक पहाड़ी राज्य था, इसके दो भाग थे जिनमें एक की राजधानी कुशीनगर (जहाँ महात्मा बुद्ध को महापरिनिर्वाण प्राप्त हुआ) और दूसरे भाग की राजधानी पावा (जहाँ वर्धमान महावीर को निर्वाण मिला) थी। इसका उल्लेख अंगुत्तर निकाय में आया है।'मल्ल' नाम 'मल्ल राजवंश' के नाम पर है जो इस महाजनपद की उस समय शासक थे।मल्लों की दो शाखाएँ थीं। एक की राजधानी कुशीनारा थी जो वर्तमान कुशीनगर है तथा दूसरे की राजधानी पावा थी जो वर्तमान फाजिलनगर है। वाल्मीकि रामायण- मल्ल देश का सर्वप्रथम निश्चित उल्लेख वाल्मीकि रामायण में इस प्रकार है कि राम चन्द्र जी ने लक्ष्मण-पुत्र चंद्रकेतु के लिए मल्ल देश की भूमि में चंद्रकान्ता नामक पुरी बसाई जो स्वर्ग के समान दिव्य थी। महाभारत में उल्लेख- महाभारत में मल्ल देश के विषय म...

महाजनपद काल - एक सम्पूर्ण यात्रा (भाग-6)-कौशल महाजनपद

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महाजनपद काल - एक सम्पूर्ण यात्रा (भाग-6)-कौशल महाजनपद   महाजनपद काल - एक सम्पूर्ण यात्रा (भाग-6)-कौशल महाजनपद (Mahajanpada Period-Kaushal Mahajanpada) कौशल महाजनपद कौशल / कोसल / कोशल महाजनपद- उत्तरी भारत का प्रसिद्ध जनपद जिसकी राजधानी विश्वविश्रुत नगरी अयोध्या थी। जिसमें उत्तर प्रदेश के फैजाबाद ज़िला, गोंडा और बहराइच के क्षेत्र शामिल थे।इन जनपद की सीमाएँ पूर्व में सदानीर नदी (गण्डक), पश्चिम में पंचाल, सर्पिका या स्यन्दिका नदी (सई नदी) दक्षिण और उत्तर में नेपाल की तलपटी थी, सरयू नदी इसे (कोसल जनपद को) दो भागों में विभाजित करती थी, एक उत्तरी कोसल जिसकी राजधानी श्रावस्ती थी और दूसरा दक्षिणी कोसल, जिसकी राजधानी कुशावती थी। गोंडा के समीप सेठ-मेठ में आज भी इसके भग्नावशेष मिलते हैं।चौथी शताब्दी ईसा पूर्व में यहां का प्रमुख नगर साकेतनगर (वर्तमान अयोध्या) हुआ करता था परंतु मौर्य साम्राज्य के अंत के बाद पुष्पमित्र शुंग ने इसका नाम बदल कर अयोध्या कर दिया जो भगवान् राम की जन्मभूमि है। वाल्मीकि रामायण में इसका उल्लेख है: कोसलो नाम मुदित: स्फीतो जनपदो महान। निविष्ट: सरयूतीरे प्रभूत धनधान्यवान् ...

महाजनपद काल - एक सम्पूर्ण यात्रा (भाग-5)-वत्स महाजनपद

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महाजनपद काल - एक सम्पूर्ण यात्रा (भाग-5)-वत्स महाजनपद   महाजनपद काल - एक सम्पूर्ण यात्रा (भाग-5)-वत्स महाजनपद (Mahajanpada Period-Vatsa Mahajanpada) वत्स महाजनपद वत्स महाजनपद 16 महाजनपदों में से एक है। आधुनिक उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद तथा मिर्ज़ापुर ज़िले इसके अर्न्तगत आते थे। इस जनपद की राजधानी कौशांबी (ज़िला इलाहाबाद,उत्तर प्रदेश) थी। ओल्डनबर्ग के अनुसार ऐतरेय ब्राह्मण में जिन वंश के लोगों का उल्लेख है वे इसी देश के निवासी थे।उत्तरपूर्व में यमुना की तटवर्ती भूमि इसमें सम्मिलित थी। इलाहाबाद से 30 मील दूर कौशाम्बी इसकी राजधानी थी।वत्स को वत्स देश और वत्स भूमि भी कहा गया है। इसकी राजधानी कौशांबी (वर्तमान कोसम) इलाहाबाद से 38 मील दक्षिणपश्चिम यमुना पर स्थित थी। महाभारत के युद्ध में वत्स लोग पांडवों के पक्ष से लड़े थे।कौशांबी में जनपद की राजधानी प्रथम बार पांडवों के वंशज निचक्षु ने बनाई थी। गौतम बुद्ध के समय वत्स देश का राजा उदयन था जिसने अवंती-नरेश चंडप्रद्योत की पुत्री वासवदत्ता से विवाह किया था। इस समय कौशांबी की गणना उत्तरी भारत के महान नगरों में की जाती थी। इस राज्य की सर्वोच्च उन...

महाजनपद काल - एक सम्पूर्ण यात्रा (भाग-3)-पांचाल महाजनपद

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महाजनपद काल - एक सम्पूर्ण यात्रा (भाग-3)-पांचाल महाजनपद   महाजनपद काल - एक सम्पूर्ण यात्रा (भाग-3)-पांचाल महाजनपद (Mahajanpada Period-Paanchaal Mahajanpada) पांचाल पौराणिक 16 महाजनपदों में से एक है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बरेली, बदायूँ और फर्रूख़ाबाद ज़िलों से परिवृत प्रदेश का प्राचीन नाम है। यह कानपुर से वाराणसी के बीच के गंगा के मैदान में फैला हुआ था। इसकी दो शाखाएँ थीं- *पहली शाखा उत्तर पांचाल की राजधानी अहिच्छत्र थी। *दूसरी शाखा दक्षिण पांचाल की राजधानी कांपिल्य थी। पांडवों की पत्नी द्रौपदी को पंचाल की राजकुमारी होने के कारण पांचाली भी कहा गया। कनिंघम के अनुसार वर्तमान रुहेलखंड उत्तर पंचाल और दोआब दक्षिण पंचाल था। पांचाल वर्तमान रुहेलखंड का प्राचीन नाम था। इसका यह नाम राजा हर्यश्व के पांच पुत्रों के कारण पड़ा था। संहितोपनिषद ब्राह्मण में पंचाल के प्राच्य पंचाल भाग (पूर्वी भाग) का भी उल्लेख है। शतपथ ब्राह्मण में पंचाल की परिवका या परिचका नामक नगरी का उल्लेख है जो वेबर के अनुसार महाभारत की एकचका है। श्री राय चौधरी का मत है कि पंचाल पाँच प्राचीन कुलों का सामूहिक नाम था। वे ये थे—...

महाजनपद काल - एक सम्पूर्ण यात्रा (भाग-2)-कुरु महाजनपद

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महाजनपद काल - एक सम्पूर्ण यात्रा (भाग-2)-कुरु महाजनपद   महाजनपद काल - एक सम्पूर्ण यात्रा (भाग-2)-कुरु महाजनपद (Mahajanpada Period-Kuru Mahajanpada) कुरु महाजनपद कुरु महाजनपद पौराणिक 16 महाजनपदों में से एक था। इसमें आधुनिक हरियाणा तथा दिल्ली का यमुना नदी के पश्चिम वाला अंश शामिल था। इसकी राजधानी आधुनिक दिल्ली (इन्द्रप्रस्थ) थी। पुराण वर्णित प्रसिद्ध राजा कुरु के नाम पर ही इसका यह नाम पड़ा था। तथ्य- *एक प्राचीन देश जिसका हिमालय के उत्तर का भाग 'उत्तर कुरु' और हिमालय के दक्षिण का भाग 'दक्षिण कुरु' के नाम से विख्यात था। भागवत के अनुसार युधिष्ठर का राजसूय यज्ञ और श्रीकृष्ण का रुक्मिणी के साथ विवाह यहीं हुआ था। *अग्नीध के एक पुत्र का नाम 'कुरु' था जिनकी स्त्री मेरूकन्या प्रसिद्ध है। *वैदिक साहित्य में उल्लिखित एक प्रसिद्ध चंद्रवंशी राजा था। कुरु के पिता का नाम संवरण तथा माता का नाम तपती था। शुभांगी तथा वाहिनी नामक इनकी दो स्त्रियाँ थीं। वाहिनी के पाँच पुत्र हुए जिनमें कनिष्ठ का नाम जनमेजय था जिसके वंशज धृतराष्ट्र और पांडु हुए। सामान्यत: धृतराष्ट्र की संतान को ही '...

महाजनपद काल - एक सम्पूर्ण यात्रा (भाग-1)

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महाजनपद काल - एक सम्पूर्ण यात्रा (भाग-1) महाजनपद काल - एक सम्पूर्ण यात्रा (भाग-1) (Mahajanpada Period)  प्रारंम्भिक भारतीय इतिहास में  छठी शताब्दी ईसापूर्व को परिवर्तनकारी काल के रूप में महत्त्वपूर्ण माना जाता है।  यह काल प्राय:  प्रारंम्भिक राज्यों, लोहे के बढ़ते प्रयोग और सिक्कों के विकास के के लिए जाना जाता है।  इसी समय में बौद्ध और जैन सहित अनेक दार्शनिक विचारधाराओं का विकास हुआ। बौद्ध और जैन धर्म के प्रारंम्भिक ग्रंथों में महाजनपद नाम के सोलह राज्यों का विवरण मिलता है। महाजनपदों के नामों की सूची इन ग्रंथों में समान नहीं है परन्तु वज्जि, मगध, कोशल, कुरु, पांचाल, गांधार और अवन्ति जैसे नाम अक्सर मिलते हैं। इससे यह ज्ञात होता है कि ये महाजनपद महत्त्वपूर्ण महाजनपदों के रूप में जाने जाते होंगे। अधिकांशतः महाजनपदों पर राजा का ही शासन रहता था परन्तु गण और संघ नाम से प्रसिद्ध राज्यों में लोगों का समूह शासन करता था, इस समूह का हर व्यक्ति राजा कहलाता था। भगवान महावीर और भगवान बुद्ध इन्हीं गणों से संबन्धित थे। वज्जि संघ की ही तरह कुछ राज्यों में ज़मीन सहित आर्थिक स्रोत...