जब भरी सभा में हुआ गौतम बुद्ध का अपमान
जब भरी सभा में हुआ गौतम बुद्ध का अपमान
गौतम बुद्ध ने शिष्यों के साथ कुरु नगर में प्रवेश किया तो रानी के सेवकों ने अपशब्द कहे।
By - टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली
Update: 2017-07-28 08:28 GMT

गौतम बुद्ध का मूल मंत्र था कि अपमान पर उत्तेजित होने की बजाय स्वयं को संतुलित रखना ही बुद्धिमानी है। एक बार वे कुरु नगर गए। वहां की रानी के बारे में लोगों का कहना था कि वह बहुत क्रूर है।
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जब रानी को पता चला कि गौतम बुद्ध कुरु आ रहे हैं तो उसने सेवकों से उनका अनादर करने के लिए कहा। गौतम बुद्ध ने शिष्यों के साथ कुरु नगर में प्रवेश किया तो रानी के सेवकों ने अपशब्द कहे, लेकिन बुद्ध शांत रहे। यह बात उनके शिष्य आनंद को अच्छी नहीं लगी।
वह उनसे बोले, 'हमें यहां से किसी ऐसे स्थान पर चले जाना चाहिए, जहां कोई हमारे साथ दुर्व्यवहार न करे।'
बुद्ध ने कहा, 'यह जरूरी नहीं है कि हम जहां जाएंगे, वहां हमारा आदर हो, लेकिन यदि कोई अनादर कर रहा है तो उस स्थान को तब तक नहीं छोड़ना चाहिए जब तक वहां शांति स्थापित न हो जाए।'
बुद्ध ने कहा कि व्यक्ति का व्यवहार युद्ध में बढ़ते हुए उस हाथी की तरह होना चाहिए जो चारों ओर के तीरों को सहता रहता है परंतु आगे बढ़ता रहता है।
उसी तरह हमें दुष्ट पुरुषों के अपशब्दों को सहन करते हुए अपना कर्म करते रहना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि सबसे उत्तम तो वह है, जो स्वयं को वश में रखे। किसी भी बात पर कभी भी उत्तेजित न हो।
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