महामाया देवी की प्रतिमा
महामाया देवी की प्रतिमा
ब्रिटिश अंग्रेजो ने काल्पनिक सीता माता के मन्दिर को पुरातत्विक खुदाई से ठीक ठीक परीक्षण करके बताया कि यह बौद्ध विहार बुद्ध की माता महामाया देवी की प्रतिमा है। उसी प्रकार साकेत नगरी अयोध्या का पुरातत्विक खुदाई करके धिक-धिक परीक्षण किया जाय तो वह मौर्यकालीन बौद्ध विहार बुद्ध की प्रतिमा है। काल्पनिक राम नही है।
1865 ई० में जर्नल कन्नीघम ने श्रावस्ती के सहेट-महेट से पश्चिम में लगभग 9 मील की दूरी पर एक गांव टंडवा की पहचान बौद्ध अवशेषों के रूप में किया था। इस गांव में बुद्ध की माता महामाया देवी की प्रतिमा को (फ़ारसी, ईरानी, हिन्दुओ) द्वारा सीता माता के नाम से पूजा जाता था। टंडवा के चारदा किले के पास कई टीले और खंडहर है जिनकी खुदाई से निस्सन्देह यह सावित है कि यह बौद्ध विहार के समान मठ और स्तूप है। जहा पर बौद्धकालीन सिक्के भी प्राप्त है।
General Cunningham and detailed in his Archeological report (Journal of Asiatic society of Bengal part-1, No- IV 1865)
Gazetteer of Oudh W.C Bennett.
Comments
Post a Comment